एक सच्चा प्रधानमंत्री- मनमोहन सिंह!!

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महज 15 साल की आयु में बंटवारे का दंश झेलकर अपने जन्मभूमि पाकिस्तान के गांव से घर गांव खेत सब छोड़ कर अमृतसर में बसने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का बचपन बेहद तंगहाली एवं गरीबी में गुजरा.

बचपन में हीं मां का साया सिर से उठ गया.

हिंदू यूनिवर्सिटी अमृतसर से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एवं कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड तक का सफर स्कॉलरशीप के दम पर तय किया.

डॉ मनमोहन सिंह ऐसे पहले भारतीय छात्र थें जिन्हें वेरनबेरी स्कॉलरशीप मिला.
यह स्कॉलरशीप दुनिया के गिने चुने छात्रों को मिलती है.

इन सब के बावजूद डॉ मनमोहन सिंह जी ने कभी #छिछोरों की तरह अपनी गरीबी का रोना नहीं रोया.
मां के मरने की स्टोरी नहीं सुनाई.

बार बार अपने मां बाप की जाति नहीं बदली.

अपने मां बाप की मनगढंत स्टोरी नहीं सुनाई.

अति अल्पसंख्यक सिक्ख धर्म के होने की दुहाई नहीं दी.

कभी खुद की जाति, धर्म की बात नहीं की.
किसी के डीएनए तो किसी की पैदाईश पर सवाल नहीं उठाया.

हर प्रकार के राजनीतिक हमले सहने के बावजूद कभी पीएम की गरिमा नहीं गिरने दी.

कभी मर्यादाविहीन भाषण नहीं दिया.

मुझे डॉ मनमोहन सिंह जी पर गर्व है.

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